अमर चित्र कथा: सुन्दरसेन
इस कहानी की रचना लगभग हजार वर्ष पूर्व हुई थी। वर्षों के बाद आज भी इसकी रोचकता बनी हुई है। मनोरंजक और रोमांचक घटनाओं से भरपूर कथासरित्सागर की यह कहानी पाठक को आद्योपांत बांधे रखती है। कथासरित्सागर कथा साहित्य का शिरोमणि ग्रंथ है, जिसकी रचना ग्यारहवीं शताब्दी में पंडित सोमदेव भट्ट ने कश्मीर में की थी। निषाद का रूपवान राजकुमार सुंदरसेन समुद्र की छाती रौंद अपनी भावी पत्नी, हंसद्वीप की राजकुमारी मंदरावती से मिलने निकल पड़ता है। उधर, अपने भावी पति से मिलने को राजकुमारी भी उतनी ही अधीर है। वह अपने प्रियतम से मिलने के लिए अपना घर त्याग देती है। पर इस मिलन से पूर्व उन्हें जिन कठिनाइयों और बाधाओं से जूझना पड़ता है, उनका जीवंत चित्रण ही अमर चित्र कथा के इस अंक में प्रस्तुत किया गया है।

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