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चित्रलेखा

Wednesday, 22/07/2026 09:13 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
03
Category
Other Pub.
Language
Hindi
चित्रलेखा

चित्रलेखा

Category 1
Category 4
NA

चित्रलेखा

भगवती चरण वर्मा के उपन्यास पर आधारित

सचित्र भारतीय साहित्य एक नवोन्मेषी साहित्यिक परियोजना है, जिसके अंतर्गत सात भारतीय भाषाओं के विख्यात उपन्यासों को सरल एवं सचित्र रूप में प्रकाशित किया जा रहा है । इसका उद्देश्य, भारतीय साहित्य की विख्यात रचनाओं और उनके लेखकों से पाठकों को परिचित कराना है। सचित्र भारतीय साहित्य की प्रत्येक पुस्तक में छह प्रसिद्ध उपन्यास होंगे, जिनमें से प्रत्येक उपन्यास के कथानक का संक्षेप सिर्फ 32 पृष्ठों में रंगबिरंगे चित्रों के साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इस प्रकार पढ़ने की प्रक्रिया सरल बन जाती है और कुछ ही मिनटों में पूरी कहानी को पढ़ा और समझा जा सकता है। भारतीय साहित्य के प्रति पाठकों को उन्मुख कराना सचित्र भारतीय साहित्य का मूलमंत्र है, जिसके ज़रिए भारतीय लेखकों और उनकी विख्यात रचनाओं की ओर पाठकों को आकर्षित कराना हमारा लक्ष्य है। यह भी गौरव की बात है कि सचित्र भारतीय साहित्य, सचित्र रूप में भारतीय साहित्य को अपनाने और विश्व भर में फैलाने की दिशा में पहला और एकमात्र प्रयास है। सचित्र भारतीय साहित्य भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत को समर्पित है।
प्रस्तुत चित्रकथा, भगवती चरण वर्मा के
 प्रसिद्द उपन्यास पर आधारित है।

उपन्यास का परिचय
अठारह वर्ष की विधवा ब्रह्मणी चित्रलेखा, क्षत्रिय और शूद्रा के वंश शंकर के पुत्र कृष्णादित्य से विवाह करती है। इसके बाद दोनों को निर्वासित कर दिया जाता है। कृष्णदित्य आत्महत्या कर लेता है। चित्रलेखा एक नर्तकी के यहाँ आश्रय पाकर एक पुत्र को जन्म देती है। मगर पुत्र का भी देहान्त हो जाता है। चित्रलेखा की सुन्दरता में एक प्रकार का आकर्षण था। यहाँ पाटलीपुत्र के सामंत बीजगुप्त से भेंट होती है। बीजगुप्त चित्रलेखा के अनुपम सौंदर्य से मोहित हो जाता है। उसे पाटलीपुत्र की राज नर्तकी  बनाकर पाटलीपुत्र लाता है। बीजगुप्त तथा चित्रलेखा बिना विवाह के विवाह-भोग जीवन बिताते हैं। फिर भी चित्रलेखा वेश्या नहीं थी। रत्नांबर अपने दोनों शिष्य विशालदेव तथा श्वेतांक को पाप का पता लगाने बीजगुप्त तथा कुमारगिरि के पास भेजता है। सम्राट की राजसभा में कुमारगिरि चित्रलेखा से हार जाता है। चित्रलेखा कुमारगिरि से मोहित हो जाती है। बीजगुप्त को त्यागकर कुमारगिरि की कुटी में रहने लगती है। पाटलीपुत्र का सामंत मृत्युंजय अपनी पुत्री यशोधरा का विवाह बीजगुप्त से कराना चाहता है। मगर श्वेतांक उससे प्रेम करके विवाह कर लेता है। जीवन से विरक्त बीजगुप्त सब कुछ त्यागकर भिखारी बनकर पर्यटन पर निकलता है। कुमारगिरि से मोह भंग हुई चित्रलेखा बीजगुप्त के पास आकर अपना भी सब कुछ दानकर वह भी एक विरागिनी सन्यासिनी बनकर बीजगुप्त के साथ रहने लगती है। मनुष्य कर्ता नहीं वह केवल करता है। वह वही करता है जो उसे परिस्थितियाँ करने को मजबूर करती हैं। संसार में पाप पुण्य कुछ नहीं है। वह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की विषमता का दूसरा नाम है।

भगवतीचरण वर्मा 
भगवतीचरण वर्मा, आधुनिक हिन्दी गद्य निर्माताओं में भगवतीचरण वर्मा उपन्यास लेखन में अपनी मौलिकता और वैशिष्ट्य के कारण अत्यंत चर्चित रहे हैं। व्यक्ति स्वतन्त्र के बादशाह, रचनाकर्म में स्वतःस्फूर्त के विश्वासी इस रचनाकार ने अपनी कृतियों में मानवीय पक्षों को संवेदनात्मक धरातल पर सहजता व कलात्मक वैशिष्ट्य के साथ रूपायितकर अपनी अलग सी पहचान बनायी। वर्मा जी का जन्म 30 अगस्त 1903 को जिला उनाव के शकीपुर गाँव में हुआ था और निधन 5 अक्तूबर 1981 को हुआ। समय परिस्थिति और सृजन की माँग के अनुसार साहित्य की अन्य विधाओं में भी वर्माजी ने अपनी लेखनी चलायी है। उनकी प्रमुख कृतियाँ काव्य - प्रेम संगीत, मधुकण, मानव, रंगों से मोह, एक दनि, सविनय और एक नाराज़ कविता। कहानी - इन्स्टालमेंट, दो बाँके, शरद और चिनगारी, मेरी कहानियाँ, मेरी प्रिय कहानियाँ, मोर्चाबंधी नाटक - बुझता दीपक, रुपया तुम्हें खा गया, वसीयत, मैं और केवल मैं, मेरे नाटक। एकांकी - सब से बडा आदमी, चौपाल में, हो कलाकार। आलोचना - साहित्य की भावनाएँ, साहित्य के सिद्धांत तथा रूप, संस्मरण और रेखाचित्र - ये सात और हम, अतीत के गर्त से। उपन्यास - पतन, चित्रलेखा, तीनवर्ष, टेढे-मेढे रास्ते, आखरी दाँव, अपने खिलौने, भूले-बिसरे चित्र, वह फिर नहीं आयी, सामर्थ्य और सीमा, थकेपाँव, रेखा, सीधी सच्ची बातें। प्रेमचन्द के परवर्ती कथा साहित्य में भगवतीचरण वर्मा सम स्यामूलक उपन्यासकार व मध्य वर्ग के शिल्पी के रूप में उभरे और उन्होंने हिन्दी उपन्यास साहित्य के विकास में अपना मौलिक योगदान दिया।

 

  • इंडया कॉमिक्स
  • शीर्षक : चित्रलेखा
  • अंक : 03
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक :  इंडया कॉमिक्स प्राइवेट लिमिटेड
  • प्रकाशन वर्ष : ....

 

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