Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
If You want to read these contents or you have any complain or suggestions please write to editor.madhursangrah@gmail.com If You want to read these contents or you have any complain or suggestions please write to editor.madhursangrah@gmail.com
Translate

महान क्रन्तिकारी एवं दूरद्रष्टा चिंतक वीर सावरकर

Tuesday, 01/09/2026 05:32 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
NA
Category
Other Pub.
Language
Hindi
महान क्रन्तिकारी एवं दूरद्रष्टा चिंतक वीर सावरकर

महान क्रन्तिकारी एवं दूरद्रष्टा चिंतक वीर सावरकर

महान क्रांतिकारी एवं दूरदृष्टा चिंतक वीर सावरकर
भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में 1857 से स्वतंत्रता प्राप्ति तक असंख्य सपूतों ने जीवन पर्यन्त संघर्ष किया। हजारों सेनानी व उनके परिवार अंग्रेजों के अत्याचारों की भेंट चढ़ गये, सैकड़ों मतवाले युवा हँसते-हँसते फाँसी के फंदे से झूल गये और असंख्य युवाओं ने जेलों में यातनाएं सहते हुए दम तोड़ दिया। तब कहीं जाकर 15 अगस्त 1947 को भारत माता को विभाजन के दंश के साथ दासता की बेड़ियों से मुक्ति मिली। स्वतंत्रता के इस महासमर में किसका कितना योगदान रहा इसकी तुलना महत्वपूर्ण नहीं क्योंकि सबका एक ही लक्ष्य स्वतंत्रता प्राप्ति था। किन्तु विडम्बना यह रही कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कई वीर सपूतों को भुला दिया गया जो स्वतंत्रता के संघर्ष के सच्चे नायक थे। नयी पीढ़ी ऐसे वीरों के त्यागमय जीवन संघर्ष से पूर्णतया अनभिज्ञ रह गई।
प्रस्तुत चित्रकथा के नायक वीर विनायक दामोदर सावरकर भारत माता के ऐसे ही सपूत थे आसाधारण व्यक्तित्व के धनी वीर सावरकर का जीवन बचपन से लेकर मृत्यु तक पूरी तरह राष्ट्र को समर्पित रहा। यूरोप प्रवास के दौरान अंग्रेजों की भूमि में रहकर अपने लेखन व वैचारिक शक्ति से उनके नाक में दम कर दिया। भारत में क्रांतिकारियों को मजबूती दी। सही मायने में सावरकर अपने आप में एक संस्था थे। स्वतंत्रता के महासमर में वे व्यक्तिगत रूप से सर्वाधिक यातना सहने वाले स्वतंत्रता सेनानी और उनका परिवार सर्वाधिक प्रताड़ित होने वाला परिवार था। सावरकर और उनके दो भाईयों ने माँ भारती की स्वतंत्रता के लिये वर्षों वर्षों तक जेल की यातनाएं सही।
वीर सावरकर बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जिनके विचारों से भगत सिंह और कई युवा क्रांतिकारी सशस्त्र संघर्ष की प्रेरणा लेते रहे और स्वतंत्रता की बलिवेदी पर अपने प्राण न्यौछावर करते रहे। क्रांतिकारियों के मुकुटमणि सावरकर अद्भुत संगठनकर्ता, दूरदृष्टा, इतिहासकार, साहित्यकार व समाज सुधारक थे। ऐसे महापुरूष की जीवन यात्रा हर युवा व भारतीय के लिए पठनीय है। जब देश के कुछ नेता नजरबंदी में सारी सुविधाओं के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहे तब माँ भारती का यह सपूत सावरकर अंडमान निकोबार की सलुलर जेल में लगभग 11 वर्षों तक यातनाएं सहन करता रहा, किंतु हृदय में कभी क्षोभ के भाव न आये। वीर सावरकर जैसा राष्ट्र भक्त स्वतंत्रता का पूजारी भारत ही नहीं विश्वभर में भी एक ही है। वो हैं स्वयं वीर विनायक दामोदर सावरकर। ऐसे तपस्वी स्वतंत्रता सेनानी का भारत सदैव ऋणि रहेगा।

शीर्षक : महान क्रांतिकारी एवं दूरदृष्टा चिंतक वीर सावरकर

संख्या: ……..

कुल पृष्ठ : 44

भाषा : हिंदी

प्रकाशक : शौर्यभूमि पब्लिकेशन

प्रथम प्रकाशित : 2024

Comments

Leave a Reply

Login to comment