लोकदेवता बाबा रामदेव जी
विद्वानों ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती है, सच भी है। सभ्यता व ज्ञान के विकास में पुस्तकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज के बढ़ते वैज्ञानिक व तकनीकी उपकरणों के समय में ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता है जो सरल व रोचक हो। इस हेतु चित्रकथा अच्छा माध्यम है। लोक देवता बाबा रामदेव के भक्त देश के अनेक प्रांतों (राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात) के सभी जाति वर्ग के हैं। भक्ति व श्रद्धा के साथ ही इनके जीवन का परिचय समाज को हो अतः ये पुस्तक समाजोपयोगी है। भारत की समाज व्यवस्था 'जीओ और जीने दो' सेवा, समानता, परिवार भाव पर आधारित है, जो भारत का मूल चिंतन है। हजारों वर्ष से चले आ रहे इस प्रकार के समाज जीवन में हमारी अपनी असावधानी के कारण जातिगत भेदभाव, ऊँच-नीच, जैसी बुराईयां आ जाने से हिन्दू समाज का मुकाबला हुआ, हालांकि इन बुराईयों पर निरन्तर प्रहार व सुधार के प्रयास भी चलते रहे। इसी कड़ी में बाबा रामदेव जी का भी प्रेरक जीवन रहा। उन्होंने समाज सेवा, जातिगत ऊँच-नीच को समाप्त करने, समाज जागरण हेतु पूरे जीवन संघर्ष किया। उनका आध्यात्मिक, सेवाभावी, समरसता वाला प्रेरक जीवन रहा। उनके महान जीवन से समाज को परिचित कराने हेतु विश्व संवाद केन्द्र ने चित्रकथा को सरल, सुबोध रूप से प्रकाशित करवाने का स्तुत्य प्रयास किया है। पूर्ण विश्वास है कि यह पुस्तक सार्थक सिद्ध होगी।
तुलसी नारायण
क्षेत्र सामाजिक समरसता प्रमुख

शीर्षक : लोकदेवता बाबा रामदेव जी
संख्या: ……..
कुल पृष्ठ : 32
भाषा : हिंदी
प्रकाशक : शौर्यभूमि पब्लिकेशन
प्रथम प्रकाशित : 2019
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