महाबली हनुमान
भारत देश महापुरुषों की जन्म भूमि रहा है। जैन पुराणों में 169 महापुरुषों का सच्चरित्र चित्रण रोचक एवं जीवन के उत्थान पतन का जीवन्त वर्णन वर्णित है। ये सभी महापुरुष तद्भव मोक्षगामी या निकट भभ्य होते हैं। पुण्य- पाप का संयोग, उत्त्थान-पतन विभिन्न प्रकार के संकटों के बीच भी रक्षा, सहनशीलता आदि उत्तम गुणों को प्रकाशित करने का साहस धैर्य देने वाला महापुरुषों का सत्य जीवन माननीय अनुकरणीय एवं चिन्तनीय है। महाराजा प्रहलाद के कुल दीपक पुत्र राजकुमार पवनजय धर्म प्रिय महापुरुष थे। पवन कुमार का अंजना सुन्दरी से विधिवत विवाह संस्कार हुआ था, किन्तु पापोदय से 22 वर्ष तक मिलन नही हो पाया। पवन कुमार की कठोरता एवं अंजनादेवी की सहनशीलता को देखकर परिवार आश्चर्य में था। अचानक अंजना का भाग्य जगा । समय पा कर अंजना के पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। बालक हनुमान सूर्य के समान तेजस्वी था तथा जिस समय उसे मामा विमान में ले कर जा रहे थे उस समय वह बालक अचानक उछल कर विमान से नीचे एक विशाल शिला पर जा गिरा। वह शिला चूर-चूर हो गई तथा बालक एक शिला खण्ड पर सुख से अपना अंगूठा चूसता रहा। ऐसे महापुरुष कामदेव, चरम शरीरी, तद्भव मोक्षगामी, अंजनी पुत्र हनुमान की जीवन गाथा विचित्र घटनाओं से भरा हुआ है। इस चित्र कथा में उनके जीवन के कुछ अंशों को रेखांकित किया गया है। पाठक जन वास्तविक हनुमान को जाने तथा अपने को पहचाने। हनुमान जी अन्त समय में मुनि दीक्षा धारण कर आठ कर्मों का नाश कर मांगीतुंगी से मोक्ष पधारे। इनके चरणों में बार-बार वंदन।
ब्रं डॉ. रेखा जैन अष्टापद तीर्थ जैन मंदिर

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