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JCK-H-008-Pradyumn Haran

Friday, 11/09/2026 05:01 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
08
Category
Other Pub.
Language
Hindi
JCK-H-008-Pradyumn Haran

JCK-H-008-Pradyumn Haran

Category 1
Category 4
NA

प्रधुम्न हरण

भारतीय जैन संस्कृति का ज्ञान कराने के लिए जैन चित्रकथा अति आवश्यक है। वर्तमान समय में कथा कहानियाँ पढ़ने की रुचि युवा वर्ग में अधिक देखी जा रही है। जीवन को उन्नत बनाने वाली कथाओं के पढ़ने से आत्मोन्नति होती ही है तथा पुन्योपार्जन का कारण भी है, धार्मिक कथाओं के पढ़ने से आत्म शान्ति का अनुभव होता है। भारतीय संस्कृति का ज्ञान कराने के लिए कथा साहित्य अति ही आवश्यक है। इस कृति में क्रीड़ा कौतकी तथा सतत् विहार करने वाले नारदजी श्री कृष्ण के दरबार में आए तथा कुछ समय ठहर कर चपल स्वभावी नारदजी अन्तपुर सत्यभामा के महल गये, सत्यभामा ने नारदजी का अपमान किया। अहंकार से युक्त नारद जी ने अपमान का बदला लेने की भावना से रुकमणी का पाणिग्रहण संस्कार श्री कृष्ण के साथ करा कर सौत के रूप में बदला लिया। रुकमणी के पुत्र प्रद्युम्न ने नाना प्रकार के कौतुहल कर के मानव समाज का मनोरंजन कर प्रायश्चित करने के हेतु धर्म साधना में तल्लीन होकर अपनी आत्मा का उद्धार कर गये।

- धर्मचंद शास्त्री

  • जैन चित्र कथा   
  • शीर्षक : प्रधुम्न हरण
  • संख्या: 08
  • कुल पृष्ठ : 32
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : आचार्य धर्मश्रुत्र ग्रंथमाला
  • प्रथम प्रकाशित : 1987

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