सम्राट् कुमारपाल और हेमचन्द्राचार्य
'कलिकाल सर्वज्ञ हेमचन्द्राचार्य' चित्रकथा में आचार्यश्री हेमचन्द्र सूरि के जीवन विषय की रोचक घटनाएँ दी गई थीं। गुजरात के राजा सिद्धराज आचार्यश्री के संपर्क के प्रभाव से सभी धर्मों के प्रति उदार बने और प्रजा के कल्याणकारी अनेक ऐतिहासिक कार्य किये। सिद्धराज के बाद गुजरात के राजसिंहासन पर कुमारपाल आसीन हुए। कुमारपाल पर प्रारम्भ से ही आचार्यश्री क प्रभाव था, जिस कारण उनके जुझारू व्यक्तित्व में विद्याप्रेम, प्रजावत्सलता, जीवदय जिनभक्ति, गुरुभक्ति और धार्मिक उदारता जैसे आदर्श गुणों का समावेश हुआ। गुजरात की चतुर्मुखी प्रगति और समृद्धि की वृद्धि हुई। श्री के. एम. मुंशी जैसे इतिहासकार विद्वानों ने भी यह स्वीकार किया है कि हेमचन्द्राचार्य जैसे दूरदर्शी, उदार आचार्य और कुमारपाल जैसा प्रजावत्सल वीर राज गुजरात की सर्वतोमुखी समृद्धि के आधार थे।
इस पुस्तक में सम्राट् कुमारपाल के इन्हीं आदर्श गुणों को प्रकट करने वाले प्रसंग और आचार्यश्री हेमचन्द्र सूरि के उपकारों की एक रोचक कहानी पाठक पढ़ेंगे। पिछली पुस्तक की भांति इस पुस्तक का आलेखन भी आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरीश्वर द्वारा हुआ है। जैन इतिहास के महापुरुषों के चरित्र लेखन में आचार्य श्री सिद्धहस्त हैं। उनके सहयोग के प्रति कृतज्ञता।
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