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DWC-H-034-Puniya Shrawak

Saturday, 12/09/2026 05:08 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
34
Category
Other Pub.
Language
Hindi
DWC-H-034-Puniya Shrawak

DWC-H-034-Puniya Shrawak

पूनिया श्रावक
जैन साहित्य में पूणिया श्रावक की सामायिक बहुत प्रसिद्ध है। सामायिक का अर्थ है - समत्व भाव की साधना। राग-द्वेष - मोह की वृत्तियाँ तथा हिंसा - आरंभ की प्रवृत्तियाँ त्याग कर साधक अपनी आत्मा में जागृत रहता हुआ जो साधना करता है, उसे सामायिक कहा जाता है। कम से कम 48 मिनट (एक मुहूर्त्त भर) इस प्रकार समत्व भावों में रमण करना एक सामायिक कहलाती है।
पूणिया श्रावक की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण थी। किंतु फिर भी वह निर्दोष श्रम करके अपनी आजीविका चलाता तथा उसमें से भी स्वधर्मी बंधु को भोजन भी कराता था। वह परम सन्तोषी, सदाचारी और धर्म का सच्चा आराधक था। भगवान महावीर ने उसकी सामायिक साधना की प्रशंसा की थी। उसकी एक सामायिक की तुलना में सम्राट् श्रेणिक के सम्पूर्ण साम्राज्य का वैभव भी तुच्छ था। इस पुस्तक में पूणिया श्रावक के आदर्श जीवन का रोचक वर्णन प्रसिद्ध मनीषी आचार्य श्री विजय नित्यानन्द सूरीश्वर जी म. ने प्रस्तुत किया है। हम आपके आभारी हैं।
-महोपाध्याय विनय सागर     - श्रीचन्द सुराना "सरस”

  • दिवाकर चित्र कथा  
  • शीर्षक : पूनिया श्रावक
  • संख्या: 34
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : श्री दिवाकर प्रकाशन
  • प्रथम प्रकाशित : ……

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