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DWC-H-021-Bhagya Ka Khel

Saturday, 12/09/2026 08:48 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
21
Category
Other Pub.
Language
Hindi
DWC-H-021-Bhagya Ka Khel

DWC-H-021-Bhagya Ka Khel

भाग्य का खेल
दिवाकर चित्रकथा अंक १३ में 'सिद्धचक्र का चमत्कार' नाम से श्रीपाल - मैनासुन्दरी की रोचक कथा का पूर्वार्द्ध प्रकाशित हुआ। जिसमें श्रीपाल के कोढ़ी होने से राजकुमारी मैना के साथ विवाह और उसके पश्चात् आयम्बिल तप के साथ नवपद आराधना के प्रभाव से कोढ़ मुक्त होने तक का प्रसंग वर्णित है। राजजँवाई के रूप में प्रसिद्ध होने के कारण एक दिन श्रीपाल का स्वाभिमान जाग उठता है, वह अपने ही पुरुषार्थ- पराक्रम पर कुछ कर दिखाने का दृढ़ संकल्प लेकर साहस और आत्म- बल के भरोसे अकेला ही घर से निकल पड़ता है।
इस यात्रा में धवल सेठ जैसे दंभी और विश्वासघाती का साथ मिलता है, जिसके कारण जगह-जगह उस पर विपत्तियाँ और कठिनाइयाँ भी आती हैं, किन्तु एक बार किये एहसान को ध्यान में रखकर विश्वासघाती धवल सेठ पर भी वह बार-बार उपकार करता जाता है, हर संकट से उसकी रक्षा करता है। श्रीपाल स्वयं भी विविध विपत्तियों से जूझता है और हर विपत्ति के समय वह अपने आराध्य इष्ट नवपद का स्मरण कर विपत्ति को वरदान में बदलता जाता है। अकेला घर से निकला श्रीपाल एक दिन अनेक सुन्दरियों का स्वामी, अनेक राज्यों का शासक और अपार ऐश्वर्य-बल- पौरुष का अधिष्ठाता बनकर मैनासुन्दरी को दिये हुए अपने वचन के अनुसार 12 वर्ष बाद चैत्र शुक्ला अष्टमी के दिन उज्जयिनी को लौट आता है। अपने पुत्र को राजराजेश्वर के रूप में देखकर माता कमलप्रभा भी हर्ष से गद्गद हो उठती है। श्रीपाल के जीवन का उतार-चढ़ाव अत्यन्त रोमांचक होने के साथ ही प्रत्येक पाठक के लिए प्रेरणादायक है कि जो संकटों में साहस और धीरज के साथ जूझता है, सबके साथ सद्भाव और मैत्री का व्यवहार करता है तथा अपने आराध्य इष्टदेव के प्रति दृढ़ श्रद्धाशील रहता है, उसका भाग्य सूर्य की तरह चमकता है, उसका जीवन सुखों के नन्दनवन सा खिला रहता है।
अनुयोग प्रवर्त्तक उपाध्याय श्री कन्हैयालाल जी महाराज की प्रेरणा से श्री गौतम मुनि जी ने प्रस्तुत 'भाग्य का खेल' का आलेख तैयार किया है। यह पाठकों के लिए रोचक होने के साथ ही प्रेरणादायी भी होगा।

-महोपाध्याय विनयसागर         - श्रीचन्द सुराना 'सरस'

  • दिवाकर चित्र कथा   
  • शीर्षक : भाग्य का खेल
  • संख्या: 21
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : श्री दिवाकर प्रकाशन
  • प्रथम प्रकाशित : ……

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