Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
If You want to read these contents or you have any complain or suggestions please write to editor.madhursangrah@gmail.com If You want to read these contents or you have any complain or suggestions please write to editor.madhursangrah@gmail.com
Translate

DWC-H-005-Bhagwan Mahaveer Ki Bodh Kathayein

Sunday, 13/09/2026 03:17 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
05
Category
Other Pub.
Language
Hindi
DWC-H-005-Bhagwan Mahaveer Ki Bodh Kathayein

DWC-H-005-Bhagwan Mahaveer Ki Bodh Kathayein

भगवान महावीर की बोध कथाएँ
भगवान महावीर अपने समय के लोकनायक थे। उन्होंने धर्म के सम्बन्ध में चली आ रही मान्यताओं एवं परम्पराओं में जो क्रान्तिकारी परिवर्तन किये, उनमें एक मुख्य परिवर्तन था। सभी जाति एवं वर्णों के लोगों को धर्म साधना करने का तथा स्त्रियों एवं शूद्रों को धर्मशास्त्र पढ़ने का समान अधिकार। इसी कारण उन्होंने युगों से चली आ रही संस्कृत भाषा में धर्मशास्त्र रचने की परम्परा को तोड़ा और अपना उपदेश (प्रवचन) उस समय की लोकभाषा प्राकृत - अर्द्धमागधी में दिया। लोकभाषा में उपदेश देने के कारण समाज के सभी वर्ग और सभी उम्र के लोग उनके उपदेश सुनते-समझते और उनको अपनी शक्ति के अनुसार ग्रहण भी करते।
भगवान महावीर की उपदेश शैली समाज के सभी वर्ग को रोचक एवं आकर्षक लगती थी। धर्म की गम्भीर से गम्भीर बात वे छोटे-छोटे व्यावहारिक उदाहरणों एवं दृष्टान्तों के द्वारा इतनी सहज और सरल शैली में समझाते थे कि वह सीधी श्रोताओं के हृदय को स्पर्श कर जाती थी। भगवान महावीर के सभी उपदेश जो आज हमें उपलब्ध हैं, अर्द्धमागधी (प्राकृत) भाषा में हैं और उन्हें 'आगम' या गणिपिटक कहा जाता है।
हमने यहाँ पर भगवान महावीर के अन्तिम उपदेश, उत्तराध्ययन सूत्र तथा छठा अंग आगम ज्ञातासूत्र की कुछ बोध कथाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया है। हमें विश्वास है यह पाठकों के लिए जितनी रोचक होगी, उतनी ही बोधप्रद भी सिद्ध होगी।
सैकड़ों पुस्तकों के रचयिता स्व. उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी द्वारा लिखित 'जैन कथाएँ' के आधार पर विद्वान् आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी ने इस पुस्तक का सम्पादन किया है। उनकी उदार भावना के प्रति हार्दिक कृतज्ञता।

  • दिवाकर चित्र कथा   
  • शीर्षक : भगवान महावीर की बोध कथाएँ
  • संख्या: 05
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : श्री दिवाकर प्रकाशन
  • प्रथम प्रकाशित : ……

Comments

Leave a Reply

Login to comment