महान क्रांतिकारी अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल
'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है' इस अमर गीत को गाते हुए न जाने कितने युवा देश की आजादी के लिए हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए। इस गीत के लेखक अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल का बचपन बुरी आदतों से भरा था, लेकिन जैसे ही वह आर्यसमाज के सम्पर्क में आए और उन्होंने स्वामी दयानंद का अमर ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' पढ़ा तो उन्होंने सारी बुरी आदतों को छोड़ दिया और उनका जीवन कुंदन बन गया। फिर उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने का संकल्प लिया और विभिन्न प्रांतों में देशभक्तों को 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' के ध्वज तले एकत्र करके क्रांति का बिगुल बजाया। अंग्रेजी सरकार भारतियों को लूटती थी और उन्होंने 'काकोरी' स्टेशन के पास सरकारी खजाने को लूट कर ब्रिटिश सरकार को खुले आम चुनौती दी। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए अंततः फाँसी के फंदे को गले लगाया।
रामप्रसाद बिस्मिल के जीवन पर आधारित यह चित्रकथा विशेषतौर पर बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए तैयार की गयी है, ताकि वे भी उनके जैसे देशभक्त, वीर, निडर और साहसी बन सकें।
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