लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह
काली अँधेरी रात में एक दर्जन से अधिक हथियारों से लैस आतंकी कश्मीर में घुसने वाले थे। ले. नवदीप सिंह को समय रहते उन्हें पकड़ना था ताकि वह अँधेरे का फ़ायदा उठाकर जंगल में न छुप जाये। नवदीप जानते थे कि यदि वो चूक गये तो कश्मीर में दुसरा मुम्बई हो सकता है ...गुरदास पुर में जन्मे नवदीप भारतीय सेना में तीसरी पीढ़ी के सैनिक थे। उनके दादा जी जूनियर कमीशन अधिकारी थे जबकि पिता जोगिंदर सिंह ने बंगाल सैपर्स में सूबेदार मेजर के रुप मे 30 वर्षो तक सेवा की और मानद कप्तान के रुप मे सेवानिवृत हुए।नवदीप ने स्नाकोत्तर की परीक्षा होटल मेनेजमेंन्ट 2006 में और एम. बी. ए. आर्मी इन्सटीटयूट मेनेजमेन्ट कलकत्ता से 2009 में पास की। नवदीप सिंह ने अपने कारपोरेट कैरियर को छोड़कर भारतीय सेना के अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में ट्रेनिंग हॉसिल की । उन्हें 2011 में सेना आयुध कोर में एक अफसर के रूप में कमीशन मिला और वो जम्मू और कश्मीर में 15 मराठा लाइट इन्फैन्ट्री में अटैचमेन्ट के लिये शामिल हो गये ।
अपने संक्षिप्त कार्य काल में नवदीप ने एक शानदार प्रदर्शन प्रस्तुत किया। उन्होने मुश्किलो का सामना भी बड़ी हिम्मत और दलेरदिली से किया। उनके कमान्डिग अधिकारी एजूटेन्ट और उनकी पलटन के जूनियर कमीशन अधिकारी उनको एक असाधारण प्रतिभाशाली उत्साहवर्धक दृढ़ और ध्यान रखने वाला अधिकारी मानते हैं। वे सब उनको महान गरिमा और गर्व के साथ याद करते हैं।
उनकी वीरता आने वाले समय में भारतीय सैनिकों को बहुत वर्षो तक प्रेरित करती रहेगी। 63वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा 26 जनवरी 2012 को नवदीप सिंह को मरणोपरान्त अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
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