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ADCK-H-44-Nayanar Ke Sant

Monday, 23/03/2026 10:38 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
44
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-44-Nayanar Ke Sant

ADCK-H-44-Nayanar Ke Sant

Category 1
Category 3
NA
Category 4
NA

नयनार के संत
शैववाद भगवान् शिव की पूजा की एक धार्मिक प्रथा है। यह विधि दक्षिण भारत में विशेष रूप से प्रसिद्ध है और ईसा युग के पूर्व से ही वहां प्रचलित है। यह वही ऐतिहासिक युग था जिसमें तत्कालीन् दक्षिण भारत के 63 नयनार सन्तों (धार्मिक प्रकाण्ड पंडित) ने इस महान् धार्मिक मत का प्रतिपादन और प्रचार किया था। इन नयनारों ने ईश्वर की शिव के रूप में अराधना पर जोर दिया जिसका चर्या, क्रिया, योग और ज्ञान के रूप में अभ्यास किया गया। तमिल के महान् सन्तों- अप्पर, सुन्दरर, ज्ञानसम्बदर और मणिक वाचागार ने अपने जीवन में इन चार प्रकार की भक्ति विधाओं का आचरण किया और इनकी ही शिक्षा दी। यह सन्त प्रतिदिन भगवान् के साथ ही रहते थे और लगभग प्रत्येक क्षण प्रत्यक्ष रूप से उनसे संपर्क रहता था। इन नयनारों के चमत्कार निम्सन्देह अद्भुत होते थे। इनकी मनोरम जीवन कथायें इस पुस्तक के पृष्ठों पर सचित्र अंकित हैं।

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : 
  • संख्या : 44
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष : फरवरी 1984

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