सूर्य, परमाल की शौर्य गाथा
शमशीर और तेग-तलवार के बल पर अरबों ने ईराक, ईरान, सीरिया, अफगानिस्तान में इस्लाम मत का प्रचार-प्रसार किया। उनकी लोलुप दृष्टि उर्वरा व सम्पन्न सिन्ध देश पर पड़ी। उन्होंने हमले पर हमले किए पर नाकाम होते रहे। सन् 712 ई० में मुहम्मद-बिन-कसिम ने एक बड़ी सेना के साथ सिन्ध पर आक्रमण किया। उस समय सिन्ध पर ब्राह्मण राजा दाहर सेन का शासन था। बौद्ध सामंतों ने देशद्रोह किया और अरबों की सहायता की। दाहर सेन लड़ते लड़ते देश पर न्योछावर हो गए। सिन्धी वीरांगनाओं ने अग्नि की लपटों का आलिंगन कर लिया।
दाहर सेन की दो वीर पुत्रियां जो जौहर नहीं कर पाई थी, धोखे से अरबों के हाथ पड़ गयीं। उनका नाम राजकुमारी सूर्यदेवी और परमाल था। कासिम ने उन्हें बंदी बना कर लूट के माल के साथ बगदाद के खलीफा के पास भेजा। खलीफा उनकी सुन्दरता देख कर चकित रह गया और उसके अन्य निकाह करकी की ख्वाहिश जाहिर की। राजकुमारियों ने उसे मूर्ख बनाकर बड़ी चतुराई के, साथ देशवासियों का अविस्मरणीय प्रतिशोध लिया।

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