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ACK-H-402-Mahabharat 37-Senapati Karn

Friday, 16/10/2026 03:04 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
402
Category
ACK
Language
Hindi
ACK-H-402-Mahabharat 37-Senapati Karn

ACK-H-402-Mahabharat 37-Senapati Karn

महाभारत 37 : सेनापति कर्ण
भरतवंश की गाथा पर महर्षि वेदव्यास ने महाभारत नाम का महाकाव्य रचा। स्वयं न्यास की आज्ञा से उनके शिष्य वैशम्पायन ने उसे सबके बीच पढ़ कर सुनाया। यह कथावाचन व्यास के पौत्र के प्रपौत्र राजा जनमेजय और अनेक ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में हुआ था। ये ऋहषि-मुनि जनमेजय के सर्पसत्र (बारह वर्षों तक चलनेवाले सर्पयज्ञ) में एकत्र हुए थे।महाभारत के हमारे द्वारा प्रस्तुत छत्तीसवें खंड में इसका वर्णन था कि किस प्रकार से कौरव सेनाएं अर्जुन के आक्रमण से हिम्मत हार बैठीं और बिखर गयीं। चौदहवें दिन सेनाओं ने प्रतिदिन की भांति सूर्यास्त के साथ लड़ाई बंद नहीं की, बल्कि सारी रात मशालों की रोशनी में युद्ध जारी रखा। अपनी राक्षस-सेना के साथ भीम के बेटे घटोत्कच ने रात के अंधकार का लाभ उठाने हुए, कौरव-सेना को बहुत परेशान किया। उसे नष्ट करने के लिए कर्ण को अपने दिव्य अस्त्र "शक्ति का उपयोग करना पड़ा, जिसे उसने अर्जुन के लिए बचा रखा था।उधर छल से द्रोण को यह विश्वास करा दिया गया कि उनका प्रिय पुत्र अश्वत्थामा मारा गया है। उससे द्रोण की जीने की इच्व समाप्त हो गयी, उन्होंने शस्त्र डाल दिये और धृष्ट्रद्युम्न  हमले के शिकार हो गये।

  • अमर चित्र कथा 
  • महाभारत-37   
  • शीर्षक : सेनापति कर्ण
  • संख्या: 402
  • कुल पृष्ठ : 44
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : इंडिया बुक हाउस प्रा. लि.
  • प्रथम प्रकाशित : जून 1988

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