Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
दिनांक 19 अप्रैल 2026 दिन बुधवार विक्रम संवत् 2083 वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया (अक्षय तृतीया) की हार्दिक शुभकामनाएं! दिनांक 19 अप्रैल 2026 दिन बुधवार विक्रम संवत् 2083 वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया (अक्षय तृतीया) की हार्दिक शुभकामनाएं!
Translate

ADCK-H-42-Vanar Rajkumar

Monday, 23/03/2026 10:56 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
42
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-42-Vanar Rajkumar

ADCK-H-42-Vanar Rajkumar

Category 1
Category 3
NA
Category 4
NA

वानर राजकुमार

बंगाल की लोक-कथायें एक महान् धरोहर हैं। यह कहानियाँ दादी-नानियों के मुख से निस्सृत हो पोते-नातों तक आईं और इस तरह उन्होंनें इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचाने की परम्परा को सजीव बनाए रखा। दक्षिणरंजन मित्रा मजूमदार ने जर्मनी के ग्रिम ब्रदर्स की भाँति बँगाल में भी वही कार्य करने का निश्चय किया। यह वास्तव में राष्ट्र के प्रति उनकी अमूल्य सेवा थी। उनके अथक परिश्रम से संचित यह कहानियाँ 'ठाकुरमार झूली' (दादीमाँ का झोला) के नाम से प्रकाशित हुई। रवीन्द्र नाथ टैगोर ने 72 वर्ष पूर्व, जब यह प्रकाशित हुई थी, इसके विषय में लिखा था कि यह अलौकिक चयन सर्वाधिक् राष्ट्रवादी है। इसके अद्वितीय गद्य व पद्य में दादी माँओं के मुख से निकली युगान्तरों से चली आने वाली बंगाल की लोक कथाओं का सार है। दक्षिण रंजन की जन्मशताब्दी के अवसर पर उनकी प्रसिद्ध लोक कथाओं में से इस कथा को जन-जन तक पहुँचाना आदर्श चित्र कथा के लिए गोरव की बात है।

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : वानर राजकुमार
  • संख्या : 42
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष : अप्रैल 1983 मई 1983

Comments

Leave a Reply

Login to comment