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ADCK-H-40-Daridra Rajkumar

Monday, 23/03/2026 11:15 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
40
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-40-Daridra Rajkumar

ADCK-H-40-Daridra Rajkumar

Category 1
Category 3
NA
Category 4
NA

दरिद्र राजकुमार

नन्दनकामराज की कथा प्राचीन तमिलनाड की विख्यात कहानी है। बाद में इसे दोबारा लिखा गया तथा लाखों लोगों के मनोरंजन के लिए इसका अनुवाद भी किया गया। प्रसिद्ध ‘Arabian Nights' के समान ही इस कथा में अनेक कहानियाँ अवगुष्ठिथ हैं। यह कहानियाँ अस्तित्व में कैसे आईं यह स्वयं में एक कहानी है ।चातुर्थ, राजकुमार मदनकामराज का सच्चा दोस्त था । राजकुमार को स्वकल्पित किसी कन्या से प्रेम हो गया। दोनों दोस्त इस कल्पित सौन्दर्य की खोज में निकल पड़े। एक मूर्ति के पास जाकर राजकुमार भावावेश में आकर मूर्छित हो गया। जब उसे होश आया तो वह अपना मानसिक संतुलन खो चुका था। फिर चातुर्य अकेला ही अपने मित्र की स्वप्न सुन्दरी को ढूढ़ने निकल पड़ा ताकि उसकी प्रसन्नता व मानसिक स्वास्थ्य बना रहे। चातुर्य की सूक्ष्म बुद्धि ने शीघ्र ही वो लड़कियाँ ढूंढ़ लीं जो कि मन्दिर में प्रतिष्ठित थीं। उसने उनके साथ कुछ दिन बिताए और उन्हें अनेक मनमोहक कहानियाँ सुनाई। उनका विश्वास जीत लेने के बाद उसने उन्हें अपने आने का मूल उद्देश्य बताया। तत्पश्चात् वह उन्हें मदनकामराज के पास ले गया। अपने स्वप्नों की सुन्दरी को देखकर राजकुमार अत्यधिक हर्षित हुआ और वह सामान्य हो गया।
'दरिद्र राजकुमार' भी चातुर्य द्वारा राजकुमारियों को सुनाई हुई विभिन्न कहानियों में से एक है| यह कथा वास्तविकता और कल्पना का एक सुन्दर मिश्रण होने के साथ-साथ चिर- मनोरंजक है।

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : दरिद्र राजकुमार
  • संख्या : 40
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष : जनवरी 1983

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