Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
*चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा नव संवत्सर 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं!*यह वेबसाइट निर्माणाधीन है!* *चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा नव संवत्सर 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं!*यह वेबसाइट निर्माणाधीन है!*
Translate

ADCK-H-38-Samrat Paari

Tuesday, 24/03/2026 09:20 AM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
38
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-38-Samrat Paari

ADCK-H-38-Samrat Paari

Category 1
Category 3
NA
Category 4
NA

सम्राट पारी
प्रारम्भिक ऐतिहासिक युग से ही भारत का दक्षिणी भाग तीन मुख्य राज्यों में विभाजित था। यह राज्य थे-पाड्या, शोज़ा और शेरा। इन तीन राज्यों के बीच-बीच में अनेक छोटे-छोटे राज्य थे। इन राज्यों पर शासन करने वाले राजा कई शताब्दियों तक साहित्य के पुजारी रहे। उन्होंने विद्वानों और महान् कवियों को साहित्यिक विकास हेतु 'संगम' बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस संगम काल के काव्य से ही तत्कालीन राजाओं के तथा उनकी प्रजा के जीवन और संस्कृति के विषय में ज्ञात होता है। राजाओं के निकटतम् दरबारी कवियों ने बहुत ही रोचक कविता पाठ किए हैं। ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित, जिनमें कुछ कल्पनात्मक अंश भी सम्मिलित हैं, यह कवितायें उन राजाओं तथा उनकी प्रजाओं के वास्तविक चरित्र, आचरण, प्रवृत्तियों तथा कार्य-कलापों का चित्रण करती हैं। कपिल ऐसे ही एक कवि थे। कपिल ने तथा पाव्ड्या नरेश एवं सम्राट् पारी द्वारा सम्मानित अन्य कवियों ने उनके विषय में अनेक कवितायें लिखीं। आज यह कवितायें हमें तामिल साहित्य तथा इतिहास के माध्यम से एवं किम्वदन्तियों द्वारा उपलब्ध हैं। इस प्रकार के प्रमाणों पर आधारित इस कहानी को जो कि राजा पारी और पाव्ड्या राजा स्परिक सम्बन्ध के विषय में है, बच्चों की रुचि के अनुरूप सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : सम्राट पारी
  • संख्या : 38
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष : अक्टूबर 1982

Comments

Leave a Reply

Login to comment