कबूतर और स्यार तथा अन्य कथायें
प्राचीन काल में अपढ़ किसानों का प्रमुख मनोरंजन लोक कथायें सुनता ही था। उस पुराने समय के 'कहानी सुनाने वालों' के मुख से मिस्सृत यह कहानियाँ बाद में लिखित रूप में आ गईं। इस प्रकार से वह आज हमारे लिए उपलब्ध हैं। इन विख्यात कहानी सुनाने वालों ने दूर-2 तक यात्रा की और कई बार तो पड़ोसी देशों मैं भी गए ! उन्होंने उन स्थानों से मनुष्यों तथा जानवरों की मोहक कहानियों का संकलन किया। जानवरों की कथायें विशेषकर बच्चों को रोचक लगती हैं। सूझ-बूझ से बच्चों की विनोदमयी प्रवृत्ति प्रभावित होती है। हर चतुर जानवर होता है जो अपनी चतुराई से किसी भी समस्या का जिससे कहानी का प्रन्त संतोषजनक होता है। पशुओं की बातचीत और कहानी में एक न एक ऐसा समाधान निकाल देता है। इस पुस्तक में ऐसी ही जानवरों से सम्बन्धित तीन कहानियाँ हैं जो कि लोककथाओं में से बड़े विचारपूर्वक संचित की गई हैं तथा जिनका हृदय पर अमिट प्रभाव रह जाता है।

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