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ADCK-H-34-Mahaveer Sudarshan

Tuesday, 24/03/2026 10:37 AM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
34
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-34-Mahaveer Sudarshan

ADCK-H-34-Mahaveer Sudarshan

Category 1
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NA
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महावीर सुदर्शन

'महावीर सुदर्शन' कथा सरितसागर की प्रममोल कथानों में से एक है : कई सौ साल पहले प्राचार्य गुणाढ्य प्रांध्र राज्य में प्रतिष्ठान पुर के शातवाहन राजा के दरवारी पण्डित थे। उन्होंने कन्याकुमारी से हिमालय तक की पदयात्रा करके लोग गायकों और साधारण जनता द्वारा कही जाने बाली कथानों का संग्रह किया। उन्होंने विश्व के सर्वप्रथम कथा संग्रह 'बृहत्कथा' की रचना की। दुर्भाग्य से इस बड़े कहानी-संग्रह का लगभग चौथाई हिस्सा ही उपलब्ध है। सोमदेव ने इसका संस्कृत में कथा - सरितसागर के नाम से अनुवाद किया। इन कहानियों में कई भारतीय लोक कथानों का समिश्रण है। 'महावीर सुदर्शन' उज्जयिनी का एक ब्राह्मण वीर था, जिसने अग्नि की अराधना करके श्राग्नेय खड़ग प्राप्त किया था। एक बार उसे ब्राह्मणों में अपना नेतृत्व सिद्ध करने के लिए परीक्षा देनी पड़ी। इस दौरान वह घटना चक्र में उलझ गया लेकिन अन्त में वह सफल रहा और उज्जयिनी का राजा भी बना।
यहाँ प्रस्तुत कथा में बाल पाठकों को ध्यान में रखते हुए कुछ परिवर्तन किए गए हैं।

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : महावीर सुदर्शन
  • संख्या : 34
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष : मई 1982

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