कदर्मा और देवाहुति
सृष्टि का निर्माण करते समय ब्रह्मा ने संकल्प किया कि सभी मनुष्य देव पुरुषों के रूप में जन्म लें। जब वह इस प्रकार ध्यानमग्न थे तो उसी समय उनका रूप विभक्त हो गया। दांया भाग पुरुष बन गया और बांया भाग स्त्री, स्वयंभुव मनु और सत्रूपा, जो कि रूपवान् राजकुमारी देवाहुति के तथा संपूर्ण मानव जाति के माता-पिता बने। बह्मा के हृदय से उत्पन्न कर्दमा ऋषि ने गुणवान् और सुन्दर पत्नी की प्राप्ति हेतु विष्णु की अर्चना की। विष्णु ने अपने भक्त की इच्छा पूर्ण की और इसके साथ ही उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का अनुग्रह किया। थोड़ी देर बाद ही स्वयंभुव मनु और सत्रूपा कर्दमा की कुटी में गए और उनसे अपनी बेटी का सम्बन्ध स्वीकार करने की प्रार्थना की। किन्तु कर्दमा ने इस शर्त पर देवाहुति से विवाह किया कि एक पुत्र उत्पन्न होने के बाद वह संसार से वैराग्य ले लेंगे। कुछ समय पश्चात् देवाहुति ने नौ कन्याओं को जन्म दिया जिनका विवाह नौ विख्यात ऋषियों से हुआ। किन्तु कपिल के उत्पन्न होने पर कर्दमा को अपने पिता बह्मा को दिया हुआ वचन याद आ गया और वह जंगलों में चले गए। कपिल जन्म से ही स्वतन्त्र - आत्मा थे। वह सांख्य दर्शन शास्त्र के निर्माता बने; और मानव जाति के स्वाभाविक गुरू होने के कारण उन्होंने अपनी मां देवाहुति को परमानन्द प्राप्ति का मार्ग प्रदर्शित किया।

Leave a Reply