स्वर्ण पात्र
यह लोक कथायें उस पौराणिक काल की हैं जब लोग दूर-दूर तक पैदल ही यात्रा करते थे। वह मार्ग में ठहर कर जब विश्राम करते थे तो समय बिताने के लिए एक-दूसरे को कहानियां सुनाते थे। यह कथायें प्रायः उनके निजी अनुभवों की ही होती थीं। इस प्रकार-एक दूसरे मुख से प्रसारित पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हुई यह कहानियाँ आज हमारे सम्मुख लिखित रूपं मैं प्रस्तुत हैं। 'स्वर्ण पात्र' और 'मत्ती' दोनों ही सच्ची कथायें हैं जो कि शायद सैकड़ों वर्ष पूर्व किसी यात्री ने मार्ग में एक वृक्ष की छाँह में विश्राम करते समय अपने मित्रों के मनोरंजन के लिए मुनाई थीं।

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