जड़ भारत
अनंत काल से ही इस देश के साधु-संत प्रेम, सेवा, पूजा और साधना को ग्रात्म अनुभूति का महानतम साधन बताया है। पराक्रमी राजाओं ने सत्य के प्रति अपने प्रेम के कारण अपने राज सिंहासन तथा शक्तियां त्याग दी। उन्होंने अपनी सब धन-सम्पदा त्याग दी। जिससे कि वे परमात्मा के साथ एकाकार होने का अवसर पा सकें। नेक राजाओं के समान उन्होंने स्वयं को अपनी प्रजा के कल्याण के लिये अर्पित कर दिया। वनों में रहने वाले साधुयों के समान उन्होंने सम्पूर्ण मानवता की सेवा की। भारत एक ऐसा ही राजा था, वास्तव में, वह इतना महान था कि पूरा देश ही उसके नाम से पुकारा जाने लगा। 
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