मूर्ख का भाग्य
चाहे मनुष्य अपने जीवन को सुखी बनाने के लिए कितना ही कठोर परिश्रम कर ले किन्तु उसका प्रयास ही इस विश्व में सफलता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है। मनुष्य को संसार की उस महान् शक्ति के समक्ष नतमस्तक होना पड़ता है जो कि अन्ततः मनुष्य के प्रयासों को फलीभूत करने की उत्तरदायी है। कथा-सरिता सागर से उद्धत् यह कहानी एक ऐसे मूर्ख, किन्तु भोले-भाले साधारण ब्राह्मण की हास्यात्मक घटनाओं का वर्णन करती है जिसके जीवन में अनाकांक्षित धन-सम्पत्ति प्राप्त होने से पहले अनेक उलट-फेर आ चुके थे।

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