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ADCK-H-18-Jaisal aur toral

Tuesday, 24/03/2026 06:34 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
18
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-18-Jaisal aur toral

ADCK-H-18-Jaisal aur toral

Category 1
Category 3
NA
Category 4
NA

जैसल और तोरल


कच्छ क्षेत्र में अंजर, नाम का एक छोटा नगर था, जो कभी कुख्यात डाकुओं के छिपने का स्थल था। इन डाकुत्रों का एक निर्दयी सरदार था, जैसल। उसके नाम से ही लोगों के हृदय में भय व आतं समा जाता था। सती तोरल, जो पवित्रता की एक महान देवी थी, ने यह सिद्ध कर दिखाया कि जैसल जैसा क्रूर डाकू भी महात्मा बन सकता है। सती तोरल अपने पति सनसतिया जी के साथ धरोल नाम के गांव में निवास करती थी। उनकी दयालुता तथा सहानुभूति से जैसल का पत्थर समान कठोर हृदय भी पिघल गया और वह आध्यात्म की राह पर चलने लगा। इस मार्ग पर चलकर उसने आत्म-ज्ञान के परम लक्ष्य को प्राप्त किया। अंजर अब एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। अंजर के निवासी श्रद्धापूर्वक जैसल तथा तोरल की समाधियों पर नतमस्तक होते हैं तथा ग्रास्था एवम् समर्पण की यह गाथा आने वाले तीर्थ यात्रियों को सुनाते हैं। 

 

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : जैसल और तोरल
  • संख्या : 18
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष :.......

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