राजा प्रसन्नजीत और उनका पुत्र
महाकाव्य काल के बाद छटी शताब्दी ई० पू० तक प्राचीन भारतीय इतिहास अंधकारमय रहा। इस काल ने भारत की परम सभ्यता व संस्कृति पर प्रकाश डाला। इस शताब्दी ने दो महापुरुषों को जन्म दिया - गौतम बुद्ध तथा वर्धमान् महावीर, जिन्होंने संपूर्ण संसार को आलोकित किया। इसी शताब्दी ने पराक्रमी राजाओं एवं उनके परम विशिष्ट राज्यों को प्रकाशित किया। प्रसन्नजीत भी उन्हीं राजाओं में से थे जो कि विशाल कौशल देश के राजा थे। अनेक बौद्ध तथा जैन हस्तलेखों में राजा प्रसन्नजीत का जीवन एक सूत्र के रूप में व्यञ्जित होता है। विभिन्न आँकड़े एकत्रित करके उन्हें इस पुस्तक का रूप प्रदान किया गया है। इस उद्देश्य के लिए निम्नलिखित हस्तलेखों का वर्णन किया गया है- अंगुत्तर निकाय संयुक्त निकाय भद्द साला जातक धम्मपाद अथ कथा।

Leave a Reply