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ADCK-H-01-Nau Dwaron Ki Nagari

Wednesday, 25/03/2026 07:14 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
01
Category
ADCK
Language
Hindi
ADCK-H-01-Nau Dwaron Ki Nagari

ADCK-H-01-Nau Dwaron Ki Nagari

Category 1
Category 3
NA
Category 4
NA

नौ द्वारों की नगरी

पौराणिक भाषा लाक्षणिक होती है। प्रस्तुतिकरण, प्रतिरूप या कला द्वारा ही पुराण मानवता के समक्ष सत्य की अभिव्यक्ति करते हैं। नौ द्वारों की नगरी मानव शरीर की प्रतीक है। शरीर में नौ छिद्र (नौ द्वार) हैं जैसे प्रांख, कान आदि जिनके द्वारा मनुष्य संसार के सूक्ष्म कणों को ग्रहण कर अपने व्यक्तित्व में आत्मसात करता है। श्रद्धा व भक्ति ऋषि-मुनियों का वह सुप्रसिद्ध साधन है जिसके द्वारा वह ईश्वर से भी मनुष्यों के समान ही बातचीत कर सकते हैं। सभी ग्रन्थों और प्रकाशनों की अपेक्षा ऋषि-मुनियों के जीवन ही ईश्वर प्रकृति पर अधिक विस्तृत टीकायें हैं। इसका कारण यह है कि ऋषि-मुनि ईश्वर को भाषा और शब्दों, पाठ्य-पुस्तकों अथवा ग्रन्थों रूपी साधन की अपेक्षा सजीव अनुभूति के रूप में संसार में लाते हैं। पुराणों की लाक्षणिक भाषा में नारद जैसे सन्तों की सर्व लोक यात्रा, जिसमें बैकुन्ठ, सत्य लोक और कैलाश भी शामिल हैं, का वर्णन है। नारद जैसे सन्त का सभी लोकों का भ्रमण करते समय एक ओर तो ईश्वर से और दूसरी ओर मनुष्यों व दानवों से सम्बन्ध रखना उस दिव्य भक्ति के महत्व का प्रतीक है जो कि व्यवहारिक रूप से जीवन को परिवर्तित कर सकता है। इस प्रकार वह स्वर्गिक मुनि, नारद, का भागवद् पुराण की इस रोमांचक कथा में सम्मानपूर्ण प्रति उच्च स्थान है।

 

 

 

 

  • आदर्श चित्रकथा 
  • शीर्षक : नौ द्वारों की नगरी
  • संख्या : 01
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक : आर्गस सेंट्रल इंटरप्राइजेज नई दिल्ली-13 
  • प्रकाशन वर्ष :.......

 

Comments

  • अद्भुत , आपने बहुत ही सुन्दर और व्यवस्थित तरीके से संग्रह का निर्माण किया है एक अलग अनुभव पाठकों के लिए....!!

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