कंदर्प
'कंदर्प ग्यारहवीं शती में सोमदेव द्वारा रचित 'कथासरितसागर' से ली गई एक कहानी है, जो अपनी रानी को प्रसन्न करने के लिए लिखी गयी। केशर और कंदर्प, हो युवक सुमनस और रूपवती से अदभुत परिस्थितियों में विवाह करते हैं और उनसे भी अद्भुत परिस्थितियों में अपनी पत्नियों से बिछुड़ जाते हैं। जब दोनों युवक निराश होकर अपने खोए हुए जीवन-साथियों की खोज में हैं, तब कहानी पाठक को आनंदहायक कौतुहल में पहुँचाकर आश्चर्यजनक उतार- चढ़ाव और मोड़ लेती है।सोमदेव की कहानियों में नियति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और कई बार नायक अपने लक्ष्य को पाने के लिए अलौकिक शक्तियों की सहायता प्राप्त करते हैं।

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