मिर्ज़ा साहिबां
'मिर्ज़ा-साहिबाँ 'ग्रामीण पंजाब की एक अमर प्रेम- कहानी है। अकबर बादशाह के ज़माने में पीलू नामक कवि ने इसे लोक-काव्य की शैली में लिखा था। मिर्ज़ा और साहिबाँ के प्यार के फूल चनाब नदी के किनारे खिलें; मगर हीर-शंका और दूसरे अनेक प्रेमियों की तरह इन्हें भी प्यार की राहों में आनंद के उच्चतम शिखर भी मिले और पीड़ा की अंधकारमय गुफायें भी। 'मिर्ज़ा-साहिबाँ 'सच्चे प्रेम की एक ऐसी कहानी है जो कल्पना के पंखोंपर पाठकों को अतीत के सुनहले सौंदर्य और प्रेम के संसार में ले उड़ेगी।

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