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Chaturang Katha-H-517-Mooldev

Sunday, 29/03/2026 05:24 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
517
Category
Chaturang
Language
Hindi
Chaturang Katha-H-517-Mooldev

Chaturang Katha-H-517-Mooldev

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(कथासरित्सागर) मूलदेव 

11 वीं सदी के संस्कृत साहित्य में कवि सोमदेव की रचना मूलदेव, कथासरित्सागर की एक कहानी है। उज्जयिनी का प्रसिद्ध विद्वान, मूलदेव पाटली- पुत्र के भ्रमण के दौरान एक युवती से मिलता है, जो उसे अपनी तुलना में काफ़ी मूर्ख साबित करती है। वह उसे सिर्फ़ पाठ सिखाने के लिए उससे विवाह का निश्चय करता है। वह युवती एक चतुर तरीके से अपनी बुद्धिमत्ता की श्रेष्ठता साबित कर देती है। यह कहानी पाठक को भारतीय बुद्धिमत्ता के उस सुनहरे युग में ले जाती है, जब विद्वान और बुद्धिमानी प्रायः कठिन विजयों के लिए एक- दूसरे के साथ मुकाबला करते थे। यह कहानी हास्य, सहानुभूति, समझदारी और ज्ञान के लिए एक असीम और विविध प्रकार का साधन भी जुटाती है। इस कठिन कहानी की उलझनें बताती हैं कि पुराने ज़माने में ज्ञान और हास्य कितने अधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते थे।

 

 

  • शीर्षक           :  (कथासरित्सागर) मूलदेव
  • अंक              : 517
  • कुल पृष्ठ         : 36
  • भाषा             : हिंदी 
  • प्रकाशक       : इंडिया बुक हाउस 
  • प्रकाशन वर्ष  : ____

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