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Chaturang Katha-H-515-Rupinika

Sunday, 29/03/2026 06:03 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
515
Category
Chaturang
Language
Hindi
Chaturang Katha-H-515-Rupinika

Chaturang Katha-H-515-Rupinika

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(कथासरित्सागर रूपिणिका) 

रूपिणिका कथासरित्सागर से ली गयी एक और रोचक कथा है, जिसकी रचना सोमदेव ने ग्यारहवीं शताब्दी के हौरान संस्कृत भाषा में की थी। मंदिर की नर्तकी रूपिणिका इस कथा की नायिका है। वह एक गरीब ब्राह्मण से प्यार कर बैठती है, जिसके कारण उसकी बहनामी होती है। उसकी लालची बूढ़ी माँ अपनी कुटिल चालों से रूपिणिका का उसके प्रेमी से बिछोह कराने में सफल हो जाती है। इस प्रकार खुद उसकी माँ आग में घी का काम करती है, लेकिन दोनों प्रेमी बुढ़िया के चंगुल से निकल जाते हैं, जिसके कारण कहानी एक नया मोड़ ले लेती हैं। हास्यपूर्ण और अन- होने प्रसंग कहानी को और अधिक रोचक, गंभीर और विनोदी बना देते हैं।

 

  • शीर्षक           :  (कथासरित्सागर) रूपिणिका 
  • अंक               : 515
  • कुल पृष्ठ         : 36
  • भाषा             : हिंदी 
  • प्रकाशक       : इंडिया बुक हाउस 
  • प्रकाशन वर्ष  : ____

 

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