(वेताल कथाएँ) चन्द्रप्रभा
चन्द्रप्रभा एक चतुर प्रेत द्वारा उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य को सुनायी गयी कहानियों "वेताल पंचविंशति' की एक कहानी है। भ्रमण पर निकले एक विद्वान का एक राजकुमारी से प्रेम हो जाता है। जादू की विद्या में कुशल दो युवक उसकी सहायता के लिए अपनी जादू का प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही शुरू होती है, उलझनों और कठिनाइयों भरी एक कहानी, जिसे वेताल रचता है और हंस पाठकों को आनंद हेने और उलझाने के लिए प्रस्तुत करते हैं। चतुरंग-कथा अपने पहले के प्रकाशनों में 'वेताल पंचविंशति' की अन्य कहानियाँ प्रकाशित कर चुका है - पद्मावती, वीरवर, अद्भुत बलिदान और लावण्यवती।

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