सस्सी पुन्नो
प्रेम अनंत, असीम और दिव्य है। इसकी प्रेरणा से कितने ही स्त्री-पुरुषों ने उसकी वेही पर अपनी आहुति ही है। सस्सी - पुन्नो की कहानी भी इसी प्रकार के पवित्र प्रेम की कहानी है।
भम्भोर नाम की एक छोटी और सुन्दर रियासत थी। यहीं एक धोबी के घर अनुपम सुन्दरी सस्सी का पालन-पोषण हुआ। बरसों तक धोबी के घर संतान न होने के कारण उसने अपना सारा प्यार सस्सी पर उड़ेल दिया।
पुन्नो कच्छ मकरान का एक राजकुमार था। उसके सौन्दर्य पर मुग्ध होकर कितनी ही रूपवती कन्याएं उसका दिल जीतने की कोशिश में लगी रहती थीं। लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। सस्सी के सौन्दर्य की तारीफ़ भी दूर-दूर तक फैलने लगी। जब यह बात पुन्नो के कानों तक पहुँची, वह अपनी आँखों को तृप्त करने के लिए बेचैन रहने लगा। एक व्यापारी का वेश धारणकर वह भम्मोर आया। होनों पहली नज़र में ही एक दूसरे को चाहने लगे। लेकिन प्यार की डगर हमेशा ही सीधी नहीं होती। सस्सी - पुन्नो की कहानी युगों तक याद की जाती रहेगी।

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