चेम्मीन
तकज़ी शिवशंकरन पिल्ले की 'चेम्मीन' केरल के मछुओं की ज़िंदगी और कामकाज़ तथा आशाओं और सपनों की एक सशक्त कहानी है। करुतम्मा और परीकुट्टी बचपन से एक-दूसरे को चाहते थे, पर मछुआ जाति के कठोर नैतिक नियमों के कारण उनका प्रेम पनप न सका। प्रेम पर अंकुश लगाने वाले समाज से टकराकर उनके प्रेम की उमड़ती धारा चूर- चूर हो गयी और करुतम्मा और परीकुट्टी को दुखद अंत का सामना करना पड़ा। यह कहानी मलयालम के उस मूल उपन्यास से ली गई है, जिसे एक आंचलिक साहित्य के रूप में काफ़ी प्रसिद्धी मिल चुकी है।

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