(वेताल कथाएं) पद्मावती
उज्जयिनी के राजा विक्रमाहित्य ने एक तांत्रिक की सहायता करना स्वीकार किया, जो नियत अभी रात के समय तंत्र-मंत्र द्वारा भूत-पिशाच सिद्धी की कठिन साधना किया करता था। इस कार्य के लिए राजा को एकदम मौन रह कर वेताल (शव में प्रवेश कर जानेवाली दुष्टात्मा या पिशाच) को उठा कर लाना पडता था। यह काम बहुत ही कठिन प्रमाणित हुआ। वेताल तो कथा कहनेवाला निकला, जो हर कथा के अंत में एक पहेली प्रस्तुत करता था और उसका उत्तर मांगता था। उत्तर ज्ञात होते हुए भी यहि राजा मौन रहा तो वेताल उसके सिर के हज़ार टुकड़े कर देगा और अगर राजा बोल पड़ा तो वैताल पुनः अपने निवास पेड़ पर चला जायेगा! किस तरह विक्रमादित्य ने धैर्यपूर्वक प्रश्नों के उत्तर दिये और किस तरह अंत में उन्होंने वेताल को वश में कर लिया यही वेताल पंचविंशति' की पच्चीस कथाओं का विषय है। इन पच्चीस कथाओं में से अनेक हम 'चतुरंग कथा' क्रम में प्रस्तुत करेंगे। 11 वीं और 13 वीं शताब्दी के बीच कभी ये कथाएं मूल रूप से संस्कृत में लिखी गयी थीं।

Leave a Reply