राजा चित्रकेतु .
यह पुराण-कथा एक शक्तिशाली राजा चित्रकेतू के बारे में है । सन्तान न होने के कारण राजा उदास रहता था। एक बार उस के यहां अंगिराऋषिवर आये। अंगिराऋषिवर ने देखा कि राजा किसी कारण से दुखी है। उन्होंने चित्रकेतू से उस की उदासी का कारण पूछा। राजा ने उत्तर दिया : "हे ऋषिवर ! मुझे यह चिन्ता खाए जा रही है कि मेरे बाद राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा। कृपया आप ही मुझे पुत्र प्राप्ति का कोई उपाय बताएं।" ऋषिवर ने उत्तर दिया : “हे राजन् ! तुम्हारे भाग्य में सन्तान नहीं है। अतः अपने आप को भाग्य पर छोड़ दो।” परन्तु जब राजा ने ज़िद की कि उसकी इच्छा पूरी हो तो ऋषिवर ने उसे एक यज्ञ करने की सलाह दी। साथ ही ऋषिवर ने राजा को चेतावनी भी दी कि उस की खुशी बहुत कम समय के लिए होगी। यज्ञ सम्पूर्ण हुआ और समय पा कर उस की सब से बड़ी रानी ने एक सुन्दर बालक को जन्म दिया। दोनों बहुत ही प्रसन्न थे। लेकिन वालक राजकुमार की अकस्मात् मृत्यु से उन की सारी खुशियां छिन गईं। वह बालक कौन था? वह क्यों और कैसे मरा? उस की मृत्यु के बाद राजा पर क्या बीती? इन प्रश्नों के उत्तर इस कहानी में पढ़िये। 
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