Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
*चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा नव संवत्सर 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं!*यह वेबसाइट निर्माणाधीन है!* *चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा नव संवत्सर 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं!*यह वेबसाइट निर्माणाधीन है!*
Translate

Gaurav Gatha-H-16-Ravindranath Tagore

Monday, 30/03/2026 04:47 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
16
Category
GG
Language
Hindi
Gaurav Gatha-H-16-Ravindranath Tagore

Gaurav Gatha-H-16-Ravindranath Tagore

Category 1
Category 2
Category 3
NA
Category 4
NA

रवीन्द्रनाथ टैगोर

हमारे राष्ट्रीय गान "जन गन मन" के रचनाकार रवीन्द्रनाथ टैगोर, जिन्हे लोग श्रादर से गुरुदेव कहा करते थे, 1861 में कलकत्ता में पैदा हुए थे। उनके पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर, एक प्रसिद्ध समाज सुधारक थे। उनकी साधु प्रकृति के कारण, लोग उन्हें महर्षि कहा करते थे । रवीन्द्रनाथ की शिक्षा अधिकतर घर पर ही हुई। यूनिवर्सिटी कालेज, लन्दन में भी उन्होंने एक वर्ष तक शिक्षा पायी। उनका पालन-पोषण एक ऐसे वातावरण में हुआ, जिसमें संगीत और कविता सर्वत्र व्याप्त थी। काफी छोटी उम्र में उन्होंने कविता लिखनी शुरू की और बड़े होकर एक महान कवि बने। उन्होंने नाटक, कहानियाँ, उपन्यास और निबन्ध भी लिखे। कला की सम्पूर्ण विद्याओं से उनको लगाव था। वे एक कुशल गायक और अभिनेता भी थे। उनकी कविता संग्रह "गीतांजलि" के लिए, उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। टैगोर ने शान्तिनिकेतन में एक स्कूल की स्थापना की। धीरे-धीरे यह बढ़ कर विश्वभारती जैसा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना। टैगोर का निधन 1941 में हुआ। 

  • गौरव गाथा
  • शीर्षक         : रविंद्रनाथ टैगोर
  • अंक            : 16
  • कुल पृष्ठ       : 36
  • भाषा           : हिंदी
  • प्रकाशक      : गौरव गाथा पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
  • प्रकाशन वर्ष : जनवरी 1983

Comments

Leave a Reply

Login to comment