सरोजनी नायडू
श्रीमती सरोजिनी नायडू 'भारत कोकिला' के नाम से मशहूर थीं। अपने गीत, अपने सपने, अपनी भावनाएं यहां तक कि अपनी सारी जिन्दगी उन्होंने अपने प्यारे देश को सर्पित कर दी थी। उनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में ऐसे संभ्रान्त और सुशिक्षित परिवार में हुआ था, जो प्रगतिशील मान्यताओं का हिमायती था और जहाँ हिन्दू और मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। सरोजिनी को भी यह समझ विरासत में मिली और आगे चलकर उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता तथा महिलाओं के अधिकारों के लिये प्रयास किए। बचपन से ही उन्हें घर में एक सुसंस्कृत माहौल मिला था जिसमें उनकी नैसर्गिक प्रतिभा अंग्रेजी की सुंदर कविताओं में अभिव्यक्त हुई। कम उम्र में ही अंग्रेजी भाषा पर उनका पूर्ण अधिकार हो गया था। बाद में इसी कारण वह अत्यंत प्रभावशाली वक्ता के रूप में उभरीं। विश्व को भारत की मान्यताओं, विचारों और भावनाओं से परिचित कराने के लिए सरोजिनी ने अपनी वाणी का ही सहारा लिया, उन्हें सरस्वती का वरदान मिला था। आजादी की लड़ाई में महात्मा गाँधी के साथ सरोजिनी ने भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इंडियन नेशनल कांग्रेस की अध्यक्षता करने वाली वह प्रथम भारतीय महिला थीं और स्व-तंत्र भारत के एक राज्य की पहली राज्यपाल भी। 
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