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Gaurav Gatha-H-10-Ras Bihari Bose

Monday, 30/03/2026 06:28 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
10
Category
GG
Language
Hindi
Gaurav Gatha-H-10-Ras Bihari Bose

Gaurav Gatha-H-10-Ras Bihari Bose

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रास बिहारी बोस

रासबिहारी बोस भारत के एक क्रान्तिकारी नेता थे जिन्होने ब्रिटिश राज के विरुद्ध गदर षडयंत्र एवं आजाद हिन्द फौज के संगठन का कार्य किया। इन्होंने न केवल भारत में कई क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, अपितु विदेश में रहकर भी वह भारत को स्वतन्त्रता दिलाने के प्रयास में आजीवन लगे रहे। दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने, गदर की साजिश रचने और बाद में जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना करने में रासबिहारी बोस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यद्यपि देश को स्वतन्त्र कराने के लिये किये गये उनके ये प्रयास सफल नहीं हो पाये, तथापि स्वतन्त्रता संग्राम में उनकी भूमिका का महत्व बहुत ऊँचा है। भारत को ब्रिटिश शासन की गुलामी से मुक्ति दिलाने की जी-तोड़ मेहनत करते हुए किन्तु इसकी आस लिये हुए 21 जनवरी 1945 को इनका निधन हो गया। उनके निधन से कुछ समय पहले जापानी सरकार ने उन्हें आर्डर आफ द राइजिंग सन के सम्मान से अलंकृत भी किया था।

भारत के महान् क्रांतिकारी और श्री अरविन्द के अनुयायी रासबिहारी बोस का जन्म 25 मई, 1886 को हुगली जिले के पराला बिघाठी गाँव में हुआ था। उनका छात्र जीवन बहुत सफल नहीं रहा तो उन्होंने वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में नौकरी कर ली। उन्होंने पंजाब, दिल्ली तथा यू.पी. में क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया। दिसंबर, 1912 में वाइसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना उन्हीं के दिमाग़ की उपज थी। इस कांड के बाद उनके साथी तो पकड़े गये मगर रासबिहारी फ़रार होकर बनारस पहुंच गये और वहीं किसी अज्ञात स्थान से निरंतर अपने काम में लगे रहे। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने सशस्त्र क्रांति की योजना भी बनाई परंतु एक साथी के पकड़े जाने से वह विफल हो गई।

अंग्रेज़ हुक्मरानों की हजार कोशिशों के बावजूद रासबिहारी कभी उनके फंदे में नहीं फंसे। 1915 में वे देश से निकल गये और जापान जा पहुँचे। ब्रिटिश सरकार ने उनकी वापसी के लिए जापान सरकार पर ज़ोर डाला पर वे जापानी पुलिस के भी हत्थे नहीं चढ़े। भारत की आज़ादी का उनका सपना उनके जीवन-काल में पूरा नहीं हुआ। उनका देहांत 21 जनवरी 1645 को हो गया। परंतु वे जान गये थे कि वह शुभ घड़ी अब दूर नहीं। भारत की आज़ादी का जितना श्रेय गांधीजी और उनके असहयोग आंदोलन को है उतना ही श्रेय रासबिहारी जैसे सैकड़ों क्रांतिकारियों के अपूर्व बलिदानों को है।

  • गौरव गाथा
  • शीर्षक          : रास बिहारी बोस
  • अंक              : 10
  • कुल पृष्ठ        : 36
  • भाषा            : हिंदी
  • प्रकाशक      : गौरव गाथा पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
  • प्रकाशन वर्ष : अक्टूबर 1981 

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