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Gaurav Gatha-H-07-Mather Teressa

Monday, 30/03/2026 07:28 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
07
Category
GG
Language
Hindi
Gaurav Gatha-H-07-Mather Teressa

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मदर टेरेसा

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को अग्नेसे गोंकशे बोजशियु के नाम से एक अल्बेनीयाई परिवार में उस्कुब, ओटोमन साम्राज्य (आज का सोप्जे, मेसेडोनिया गणराज्य) में हुआ था। मदर टेरसा रोमन कैथोलिक नन थीं, जिनके पास भारतीय नागरिकता थी। उन्होंने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ चेरिटी की स्थापना की। 45 सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ और मरते हुए इन्होंने लोगों की मदद की और साथ ही चेरिटी के मिशनरीज के प्रसार का भी मार्ग प्रशस्त किया। 1970 तक वे ग़रीबों और असहायों के लिए अपने मानवीय कार्यों के लिए प्रसिद्द हो गयीं, माल्कोम मुगेरिज के कई वृत्तचित्र और पुस्तक जैसे समथिंग ब्यूटीफुल फॉर गोड में इसका उल्लेख किया गया। उन्होंने 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। मदर टेरेसा के जीवनकाल में मिशनरीज़ ऑफ चेरिटी का कार्य लगातार विस्तृत होता रहा और उनकी मृत्यु के समय तक यह 123 देशों में 610 मिशन नियंत्रित कर रही थी। इसमें एचआईवी/एड्स, कुष्ठ और तपेदिक के रोगियों के लिए धर्मशालाएं/ घर शामिल थे और साथ ही सूप रसोई, बच्चों और परिवार के लिए परामर्श कार्यक्रम, अनाथालय और विद्यालय भी थे। मदर टेरसा की मृत्यु के बाद उन्हें पोप जॉन पॉल द्वितीय ने धन्य घोषित किया और उन्हें कोलकाता की धन्य की उपाधि प्रदान की। हार्ट अटैक के कारण 5 सितंबर 1997 के दिन मदर टैरेसा की मृत्यु हुई। 

यह कहानी मदर टेरेसा की है जो पिछले तीस वर्षों से भी अधिक समय से गरीबों, रोगियों और असहायों की सेवा कर रही हैं। उन का जन्म युगोस्लाविया में 27 अगस्त 1910 में हुआ। उन का नाम एगनिस रखा गया। अभी वे स्कूल में ही पढ़ती थीं जब उन में गरीबों की सहायता करने की उत्कट लालसा ने जन्म लिया। 1928 में लोरेटो कॉन्वेंट में प्रवेश पाने के बाद वह भारत आ गईं। लगभग बीस साल उन्होंने कलकत्ता में सेंट मेरी हाई स्कूल में पढ़ाया। 1948 में गरीबों की सेवा करने के लिये उन्होंने कॉन्वेंट छोड़ दिया। उन्होंने अपना पहला झोंपड़पट्टी स्कूल केवल पांच रूपये से खोला। लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों को उन के कार्य की महानता का आभास हुआ, उन्हें पैसे और साधनों की सहायता मिलने लगी। 1950 में उन्होंने 'मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी' की स्थापना की। इस संस्था ने धीरे-धीरे संसार भर में असहायों, अबलाओं, कुष्ठ रोगीयों और अनाथों के लिए अनेक स्कूल, औषधालय और आश्रम स्थपित किये। मदर टेरेसा का यह कार्य समस्त संसार में प्रशंसा का विषय बना। उन्हें अब तक अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं जिन में नेहरू अवार्ड और नोबेल शान्ति पुरस्कार भी शामिल है। भारत सरकार ने उन्हें भारत-रत्न की सर्वोच्च उपाधि से भी विभूषित किया है।

  • गौरव गाथा
  • शीर्षक          : मदर टेरेसा
  • अंक              : 07
  • कुल पृष्ठ        : 36
  • भाषा            : हिंदी
  • प्रकाशक      : गौरव गाथा पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
  • प्रकाशन वर्ष : अप्रैल 1981

 

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