जवाहरलाल नेहरू
स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने छह बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित किया। हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए। 1942 के 'भारत छोड़ो' आंदोलन में नेहरूजी 9 अगस्त, 42 को बंबई में गिरफ्तार हुए और अहमदनगर जेल में रहे, आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार में और आजादी के बाद 1947 में भारत के प्रधानमंत्री बने और 27 मई, 1964 को उनके निधन तक इस पद पर बने रहे। नेहरू के कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना, राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान करना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु करना उनके मुख्य उद्देश्य रहे।
14 नवम्बर, 1886 हमारे इतिहास में एक अविस्मर्णीय दिन है। यह दिन भारत के महान सपूत और स्वतंत्रता सैनानियों के सरताज जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन है। भारत में इसे 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है। जवाहर लाल नेहरू का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता मोती लाल नेहरू प्रसिद्ध और सम्पन्न वकील थे। जवाहर लाल नेहरू की शिक्षा इंग्लैंड में हुई थी। वे बैरिस्टर बने, और इलाहाबाद में अपने पिता के सहयोगी के रूप में वकालत करने लगे। बाप और बेटे दोनों ने ही गांधी जी के नेतृत्व में भारत के स्वतंत्रता-संग्राम में भाग लेने के लिए अपनी वकालत और रईसी ठाठबाट के जीवन को तिलांजलि दे दी। जवाहर लाल ने कई लम्बे और एकाकी वर्ष जेल में बिताये। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधान मंत्री बने। वे अपने को जनता का प्रथम सेवक मानते थे। उन्होंने भारत को एक बार फिर महान देश बनाने के लिये कठिन परिश्रम किया। वे जीवन के अंतिम साँस तक कार्य करते रहे। नेहरू ने भारत के नियोजित विकास का कार्य आरम्भ किया। उन्होंने देश में "वैज्ञानिक सोच" को पोषण देने की चेष्टा की। उनका विश्वास था कि विज्ञान की प्रगति में भाग लेकर ही भारत अपना विकास कर सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय उद्देश्यों की उपलब्धि के लिये धर्मनिर्पेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र पर पूर्णरूपेण बल दिया। नेहरू ने अपनी तमाम विचार-शक्ति और कार्य-शक्ति राष्ट्रों के बीच मैत्री और शान्ति के लिए समर्पित की।" उन्होंने अफ्रीका और एशिया के स्वतंत्रता आन्दोलन को नैतिक सर्मथन प्रदान किया। नेहरू बच्चों को बहुत प्यार करते थे, और बच्चे भी उन्हें उतना ही प्यार करते थे, और चाचा नेहरू कहते थे। जवाहर लाल नेहरू के जीवन की कहानी, महापुरुष के जीवन की कहानी है - ऐसे जीवन की कहानी जो उन्होंने बहुत शान से जिया।
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