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Gaurav Gatha-H-01-Veer Sawarkar

Monday, 30/03/2026 09:44 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
01
Category
GG
Language
Hindi
Gaurav Gatha-H-01-Veer Sawarkar

Gaurav Gatha-H-01-Veer Sawarkar

Category 1
Category 2
Category 3
NA
Category 4
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वीर सावरकर

सावरकर दुनिया के अकेले स्वातंत्र्य योद्धा थे जिन्हें दो-दो आजीवन कारावास की सजा मिली, सजा को पूरा किया और फिर से राष्ट्र जीवन में सक्रिय हो गए। वे विश्व के ऐसे पहले लेखक थे जिनकी कृति 1857 का प्रथम स्वतंत्रता को दो-दो देशों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया। सावरकर पहले ऐसे भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। वे पहले स्नातक थे जिनकी स्नातक की उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अँगरेज सरकार ने वापस ले लिया। वीर सावरकर पहले ऐसे भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। वीर सावरकर पहले ऐसे भारतीय विद्यार्थी थे जिन्होंने इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना कर दिया। फलस्वरूप उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया। वीर सावरकर ने राष्ट्र ध्वज तिरंगे के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव सर्वप्रथम ‍दिया था, जिसे राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने माना। उन्होंने ही सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का लक्ष्य घोषित किया। वे ऐसे प्रथम राजनैतिक बंदी थे जिन्हें विदेशी (फ्रांस) भूमि पर बंदी बनाने के कारण हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला पहुँचा। वे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का चिंतन किया तथा बंदी जीवन समाप्त होते ही जिन्होंने अस्पृश्यता आदि कुरीतियों के विरुद्ध आंदोलन शुरू किया। दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंदमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएँ लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई दस हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा।

आज हम स्वतन्त्र भारत के नागरिक हैं। पन्द्रह अगस्त 1947 को हम स्वतन्त्र हुए, परन्तु यह स्वतन्त्रता कोई भेंट नहीं थी, जो अंग्रेज़ों ने हमारी झोली में डाल दी। इसे पाने के लिए भारत के हज़ारों नर-नारियों ने तरह तरह के दुख सहन किये। कई क्रान्तिकारी नवयुवक फांसी पर लटक गये और कई जेलों में घुल-घुल कर मर गये। विनायक दामोदर सावरकर, जो वीर सावरकर के नाम से प्रसिद्ध हैं, प्रारम्भिक क्रान्तिकारियों में से थे। उनका जन्म 1883 में महाराष्ट्र के एक चित्पावन ब्राह्मण परिवार में हुआ। 1899 में जब वह सोलह वर्ष के थे, उन्होंने "मित्र मंडल" नाम का एक गुप्त दल स्थापित किया जिसका लक्ष्य लोगों को अंग्रेज़ों के विरुद्ध विद्रोह के लिये भड़काना था। मैट्रिक पास करने पर वह पू के फ़रगुसन कालेज में दाखिल हो गये। वहां उनको क्रान्तिकारी सरगर्मियां और तेज़ हो गईं। कालेज के बहुत से विद्यार्थी उनसे प्रभावित हो कर क्रान्तिकारी बन गये। 1904 में सावरकर ने "मित्रमंडल" का नाम बदल कर "अभिनव भारत" रख दिया। "अभिनव भारत" का मुख्य कार्यालय नासिक में था। देश में बहुत से दूसरे गुप्त दलों के साथ उसके गहरे सम्बन्ध थे। सावरकर बैरिस्टर बनने के लिये 1906 में इंग्लैंड गये। लोकमान्य तिलक ने उनको । छात्रवृत्ति दिलवाई। सावरकर का इंग्लैंड जाने का वास्तविक उद्देश्य विदेश में क्रान्तिकारी सरगर्मियों को बढ़ावा देना था। 1910 में सावरकर को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस की निगरानी में भारत भेजने का प्रबन्ध किया गया। जब उनका जहाज़ फ्रांस के बन्दरगाह मार्से के निकट पहुंचा तो सावरकर ने पुलिस को चकमा दे कर समुद्र में छलांग लगा दी और तैर कर फ्रांस की भूमि पर जा पहुंचे। ब्रिटिश पुलिस ने सावरकर को फ्रांस की भूमि पर गैरकानूनी ढंग से गिरफ्तार कर लिया। भारत पहुंचने पर सावरकर को षड़यन्त्र के एक मुकदमे में लपेट लिया गया और उम्र कैद की सज़ा दी गई। उनको अंडेमान भेज दिया गया, जिसे उन दिनों काला पानी कहा जाता था।

  • गौरव गाथा
  • शीर्षक          : वीर सावरकर
  • अंक              : 01
  • कुल पृष्ठ        : 36
  • भाषा            : हिंदी
  • प्रकाशक      : गौरव गाथा पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
  • प्रकाशन वर्ष :  मई 1980

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