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ACK-H-424-Chatur Nartaki

Thursday, 16/04/2026 08:52 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
424
Category
ACK
Language
Hindi
ACK-H-424-Chatur Nartaki

ACK-H-424-Chatur Nartaki

अमर चित्र कथा- चतुर नर्तकी

'कथासरित्सागर' संस्कृत का प्रसिद्ध ग्रंथ है। यह कहानियों का विशाल संग्रह है, जिसका संकलन सोमदेव नाम के कवि ने 11 वीं सदी के आस-पास किया था। यह चौबीस हिस्सों में बंटा हुआ है, जिन्हें 'तरंग' कहा गया है. इन तरंगों में गजब की कहानियां भरी पड़ी हैं। ये कहानियां रोचक होने के साथ-साथ भारतीय मस्तिष्क की सूझबूझ और कल्पनाशक्ति का भी परिचय देती हैं। इस तरह हम कथासरित्सागर में अनिंद्य सुंदरियों और उनके बहादुर प्रेमियों, राजाओं और उनकी राजधानियों, राजनीति और कूटनीति, जादू और टोने, छलछद्म, धोखाधड़ी और युद्ध की कहानियां पाते हैं। प्रस्तुत कहानी इसी संग्रह से ली गयी है। 

 

यह एक बहुत ही रोचक और बुद्धिमत्ता से भरी कहानी है। उज्जयिनी, वर्तमान में उज्जैन में मूलदेव नाम का एक बहुत विद्वान और चतुर ब्राह्मण रहता था। उसे अपनी बुद्धि पर बहुत गर्व था। एक बार वह पाटलिपुत्र, वर्तमान में पटना पहुँचा, जहाँ के लोग अपनी समझदारी के लिए जाने जाते थे। वहाँ उसकी मुलाकात देवदत्ता नाम की एक बहुत ही सुंदर और बुद्धिमान नर्तकी से हुई। देवदत्ता और मूलदेव के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने या बुद्धिमत्ता में हराने की होड़ मच गई। देवदत्ता ने अपनी चतुराई से मूलदेव को कई बार मात दी। एक बार जब मूलदेव सो रहा था, तो देवदत्ता के लोग उसकी जानकारी के बिना उसके नीचे से पलंग तक उठा ले गए और उसे पता भी नहीं चला। सुबह उठने पर मूलदेव को अपनी इस हार पर बहुत लज्जा महसूस हुई। आगे की कहानी के लिए यह कॉमिक्स पढ़ें........!

  • अमर चित्र कथा 
  • शीर्षक : चतुर नर्तकी
  • अंक : 424
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक :  इण्डिया बुक हाउस पब्लिकेशन 
  • प्रकाशन वर्ष : अप्रैल 1990

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